Next Story
Newszop

लेख: ट्रेड वॉर की वजह से हम बन सकते हैं चीन... ट्रंप का धोखा, भारत के लिए मौका

Send Push
मृत्युंजय राय, नई दिल्ली: डोनॉल्ड ट्रंप ने तीन बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा, जिसमें दो बार उन्हें जीत मिली 2016, 2020 और 2024 तीनों ही चुनावों में उन्होंने टैरिफ का मुद्दा उठाया। पहले कार्यकाल में उन्होंने चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर शुरू की। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ समूची दुनिया के साथ व्यापार युद्धशुरू कर दिया है। चीन की परेशानी: चीन पर दूसरे कार्यकाल में ट्रंप 54% का टैरिफ लगा चुके हैं। पहले कार्यकाल में ट्रंप ने चाइनीज इंडस्ट्रियल गुड्स पर 25% और कुछ कंस्यूमर गुड्स पर 7.5% का टैरिफ लगाया था, जिसे जो बाइडन ने जस का तस रहने दिया। कुछ अनुमानों के मुताबिक, चीन पर अमेरिका का कुल टैरिफ अब 60% हो गया है। दूसरों पर अधिक टैरिफ: यही हाल वियतनाम, थाइलैंड, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों का है। इन सभी देशों पर भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगा है। बांग्लादेश पर उन्होंने 37% का टैरिफ लगाया है जो पाकिस्तान एक के बाद एक आर्थिक संकट में फंसता रहता है, उस पर भी ट्रंप ने 29% का आयात शुल्क लगा दिया है। डपिंग का खतरा: इतने भारी-भरकम टैरिफ के बाद चीन के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहना मुश्किल होगा उसके हाथ से बहुत पहले ही सस्ते श्रम का लाभ निकल चुका है। फिर कोरोना महामारी के बाद पश्चिमी देशों को लगा कि चीन केंद्रित सप्लाई चेन व्यवस्था उनके लिए जोखिम भरी हो सकती है तो थाइलैंड और वियतनाम जैसे देशों में पश्चिमी कंपनियों ने अपनी यूनिटें लगाई। चीन की कंपनियों ने भी ट्रंप के पहले ट्रेड वॉर से बचने के लिए यही रास्ता अपनाया। भारत नाकाम: इसी वजह से तब 'चाइना प्लस वन को लेकर चर्चा तेज हुई। इससे भारत के लिए भी अवसर बने और ऐपल के फॉक्सकॉन जैसे वेंडरों ने भारत में बड़ी यूनिट लगाई। भारत ने कई सेग्मेंट में आयात से निर्भरता कम करने और चाइना प्लस वन का फायदा उठाने के लिए परफॉरमेंस लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) जैसी योजना पेश की नए निवेश पर रिवायती टैक्स योजना लाई गई ताकि फॉरन इन्वेस्टमेंट बढ़े। लेकिन अभी तक भारत को इसमें बहुत कामयाबी नहीं मिली है। 'चाहना प्लस 'वन' का फायदा वियतनाम और थाइलैंड जैसे देशों को हमारे मुकाबले कहीं अधिक मिला। सही नीतियों की जरूरत: लेकिन 2 अप्रैल के ट्रंप के टैरिफ संबंधी ऐलान से यह मौका फिर से भारत के सामने आया है। वियतनाम पर 46% और थाइलैंड पर 36% का आयात शुल्क अमेरिका ने लगाया है, जबकि भारत के लिए यह 26% है। इसलिए अगर भारत सरकार सही नीतियां अपनाती है और जरूरी रिफॉर्म्स करती है तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ तेज करने में कामयाबी मिल सकती है। बांग्लादेश का क्या होगा: अगर बांग्लादेश की बात करें तो उस पर ट्रंप ने भारत की तुलना में 11% अधिक टैरिफ लगाया है। ग्लोबल टेक्सटाइल ट्रेड में उसके साथ चीन, वियतनाम और कंबोडिया भी बड़ी ताकतें हैं। बांग्लादेश के लिए यह इंडस्ट्री कितनी अहम है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट (GDP) में इस उद्योग का योगदान 11% है, जबकि उसके कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 80% है। यानी अगर बांग्लादेश की यह इंडस्ट्री बैठ जाए तो देश का हाल बेहाल हो जाएगा। श्रीलंका के लिए भी अमेरिकी निर्यात में टेक्सटाइल का बड़ा योगदान है। लेकिन ट्रंप के 44% टैरिफ लगाने से अमेरिकी बाजार में वहां की कंपनियों के लिए भी प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं रह जाएगा। टेक्सटाइल में मौका: भारत के लिए अच्छी बात यह है कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री में उसके पास विश्वस्तरीय कंपनियां हैं। उसकी इन देशों से मुकाबला करने की क्षमता सिर्फ लागत के स्तर पर प्रभावित हो रही थी। अब जबकि इन देशों पर अमेरिका ने भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगाया है तो भारतीय कंपनियों के पास प्राइसिंग को लेकर उनसे मुकाबला करने की क्षमता लौट आएगी। लेदर गुड्स पर भी यह बात लागू होती है, जिसमें वियतनाम बड़े पैमाने पर अमेरिका को निर्यात करता है इसलिए इस उद्योग में भी भारत अमेरिकी बाजार में उसका मुकाबला कर सकता है। रिफॉर्म्स करने होंगे: लेकिन यह हाथ पर हाथ रखकर बैठने से नहीं होगा भारत में ऐसे उद्योगों की ग्रोथ में सख्त श्रम कानून बाधा बने हुए हैं। अगर सरकार श्रम सुधार करती है तो टेक्सटाइल और लेदर गुड्स जैसी कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर होगी। वे जरूरत पड़ने पर अधिक लोगों को काम पर रख पाएंगी और जब काम कम हो तो उस हिसाब से वर्कफोर्स को एडजस्ट कर पाएंगी। इसके साथ सरकार को चाइना प्लस वन का फायदा उठाने के लिए दूसरे सुधार भी करने होंगे ताकि अगर कोई कंपनी नया प्लांट लगाना चाहती है तो उसे जमीन सहित दूसरी सुविधाएं जल्द और बगैर परेशानी के मिलें। सरकार की चुनौती: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहले कार्यकाल से ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने का इरादा रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहल इसी का नतीजा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कह भी चुके हैं कि जिस तरह से ट्रंप के लिए 'अमेरिका फर्स्ट है, उसी तरह मेरे लिए 'इंडिया फर्स्ट' ऐसे में आज उनकी सरकार के सामने टैरिफ की आपदा को अवसर में बदलना एक बड़ी चुनौती है।
Loving Newspoint? Download the app now