प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद में कई ऐसे पौधे हैं जो स्वास्थ्य के लिए अनमोल खजाना साबित होते हैं। इन्हीं में से एक है गोखरू। यह पौधा भले ही आम लोगों के लिए कम जाना-पहचाना हो, लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसे एक प्रभावशाली औषधि माना जाता है। गोखरू का उपयोग वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करने के लिए किया जाता है। इसके फल, पत्ते और तना – सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं जो शरीर की कई स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी साबित होते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सा में गोखरू का महत्व
गोखरू का उल्लेख आयुर्वेद की प्रमुख ग्रंथों जैसे चरक संहिता में किया गया है। इसमें इसे विशेष रूप से मूत्र संबंधी विकारों और वात रोगों में लाभकारी बताया गया है। यह पौधा मुख्यतः मानसून के मौसम में उगता है और इसके कांटेदार फल में अनेक बीज होते हैं, जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
सिरदर्द में राहत देने वाला
रिसर्च के अनुसार, अगर रोजाना सुबह और शाम 10-20 मिली गोखरू का काढ़ा सेवन किया जाए, तो सिरदर्द में काफी राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त, दमा के मरीजों के लिए भी यह उपयोगी है। 2 ग्राम गोखरू चूर्ण को सूखे अंजीर के साथ लेने से सांस की तकलीफ में सुधार देखा गया है।
पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है
गोखरू का एक और बड़ा फायदा है इसकी पाचन में सुधार करने की क्षमता। गोखरू का काढ़ा पीपल चूर्ण के साथ लेने से हाजमा बेहतर होता है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यदि मूत्र संबंधी समस्या हो, तो इस काढ़े में थोड़ा सा मधु मिलाकर पीने से लाभ होता है।
जोड़ों के दर्द में असरदार
जिन लोगों को जोड़ों के दर्द या गठिया की पुरानी समस्या है, उनके लिए गोखरू रामबाण साबित हो सकता है। गोखरू के फल से बना काढ़ा नियमित रूप से पीने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। रिसर्च यह भी बताती है कि यह पुरानी से पुरानी गठिया की समस्या में असरदार है।
किडनी स्टोन का प्राकृतिक इलाज
गोखरू को पथरी के इलाज के लिए भी उपयोगी माना जाता है। यदि गोखरू चूर्ण को शहद के साथ नियमित रूप से लिया जाए, तो यह किडनी स्टोन को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा, गोखरू को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाने से खुजली, दाद और स्किन एलर्जी में भी राहत मिलती है।
पुरुष प्रजनन क्षमता को बढ़ाने वाला
पुरुषों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए भी गोखरू का प्रयोग किया जाता है। इसे दूध में उबालकर पीने से स्पर्म काउंट और गुणवत्ता में सुधार होता है। वहीं, गोखरू पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) से बना काढ़ा बार-बार होने वाले बुखार में भी लाभकारी होता है।
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